The Recent Story

यूपी से केंद्रीय टीम में इकलौते मुस्लिम चेहरा प्रो. तारिक मंसूर कौन हैं, जिन्हें भाजपा ने बनाया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक ढांचे में हुए महत्वपूर्ण फेरबदल के तहत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पूर्व कुलपति और उत्तर प्रदेश से विधान परिषद सदस्य (MLC) प्रो. तारिक मंसूर को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

भाजपा के केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची में उत्तर प्रदेश से प्रो. तारिक मंसूर ही एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं।

एक प्रख्यात शल्य चिकित्सक और शैक्षणिक प्रशासक से लेकर देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल के केंद्रीय संगठन तक की उनकी यह यात्रा, भाजपा की उस व्यापक रणनीति को दर्शाती है जिसमें शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और मध्यममार्गी बौद्धिक चेहरों को आगे बढ़ाया जा रहा है।


चार दशकों का शैक्षणिक व चिकित्सा करियर

सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले प्रो. तारिक मंसूर का चार दशकों से अधिक का समय शिक्षा, चिकित्सा शोध और स्वास्थ्य प्रशासन में बीता है। 20 सितंबर 1956 को जन्मे प्रो. मंसूर ने अपनी उच्च शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMC) से प्राप्त की।

  • शिक्षा व विशेषज्ञता: उन्होंने 1978 में MBBS और 1982 में जनरल सर्जरी में MS की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद 1994 में उन्होंने इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन्स (FICS) की फेलोशिप हासिल की।
  • अस्पताल प्रशासन: वह JNMC के सर्जरी विभाग के अध्यक्ष और प्राचार्य व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे।
  • शोध कार्य: उनके 120 से अधिक शोध पत्र विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने 60 से अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल शोधों का मार्गदर्शन किया है।
  • अकादमिक पद: वह एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया (यूपी चैप्टर) के अध्यक्ष और एएमयू टीचर्स एसोसिएशन (AMUTA) के मानद सचिव भी रहे।

मई 2017 में उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने अप्रैल 2023 तक अपनी सेवाएं दीं। उनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से ‘A+’ ग्रेड हासिल किया।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति और प्रशासनिक अनुभव

विश्वविद्यालय के अलावा प्रो. मंसूर ने राष्ट्रीय स्तर की कई नीतिगत एवं सलाहकार समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

पद्म पुरस्कार समिति: उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार चयन समिति का सदस्य नामित किया गया था।

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI): वह चिकित्सा शिक्षा का प्रतिनिधित्व करने वाली नियामक संस्थाओं में शामिल रहे।

उच्च शिक्षा संस्थान: वह आईआईएम लखनऊ (IIM Lucknow) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तहत मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के शासी निकाय के सदस्य रहे हैं।

नीतिगत सुधार: उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), ऑनलाइन लर्निंग फ्रेमवर्क और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के निर्माण के लिए गठित विभिन्न कार्यसमूहों में अपना योगदान दिया।


    राजनीति में प्रवेश और नया दायित्व

    अप्रैल 2023 में AMU के कुलपति पद से सेवानिवृत्त होने से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल द्वारा उन्हें विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत किया गया था। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें भाजपा के केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी दी गई।

    2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान, प्रो. मंसूर को पार्टी की राष्ट्रीय घोषणापत्र समिति (Manifesto Committee) का सदस्य भी बनाया गया था, जहाँ उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ी नीतिगत प्राथमिकताओं को रेखांकित करने में भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मशती समारोह के लिए गठित उच्चस्तरीय राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं।


    भाजपा के लिए रणनीतिक मायने

    प्रो. तारिक मंसूर की केंद्रीय संगठन में इस प्रमुख भूमिका के पीछे कई महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलू देखे जा रहे हैं:

    • बौद्धिक वर्ग से जुड़ाव: भाजपा अपनी केंद्रीय टीमों में अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों, न्यायविदों और शिक्षाविदों को शामिल करने की नीति पर काम कर रही है। प्रो. मंसूर की उपस्थिति पार्टी में नीतिगत संवाद को मजबूती प्रदान करती है।
    • उत्तर प्रदेश में प्रतिनिधित्व: देश के सबसे बड़े राजनीतिक राज्य उत्तर प्रदेश से एकमात्र मुस्लिम चेहरे के रूप में केंद्रीय टीम में शामिल होना, राज्य के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
    • पसमांदा व मध्यममार्गी संवाद: शिक्षा, स्वास्थ्य और मुख्यधारा के विकास पर केंद्रित संवाद के माध्यम से पार्टी की रणनीति अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पैठ बनाने की रही है। प्रो. मंसूर का शैक्षणिक व प्रशासनिक आधार इस संवाद को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

    आगामी चुनौतियाँ और भूमिका

    आगामी सांगठनिक कार्यक्रमों और विभिन्न राज्यों के चुनावी परिदृश्य को देखते हुए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के रूप में प्रो. तारिक मंसूर जैसे नीति-विशेषज्ञों पर मुख्य रूप से दोहरी जिम्मेदारी होगी: एक तरफ सांगठनिक विस्तार और दूसरी तरफ प्रबुद्ध वर्ग एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ पार्टी के संवाद को मजबूत करना।