दिल्ली के साकेत थाने में दो महिला स्वतंत्र पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी का आरोप लगा है।
‘फोर पीएम न्यूज़ नेटवर्क’ से जुड़ी पत्रकार शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से नए विंग के उद्घाटन की रिपोर्टिंग कर रही थीं।
घटना के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने एक संयुक्त बयान जारी कर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की कोई आधिकारिका प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं, साकेत थानाध्यक्ष दिनेश कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में इस मामले में किसी भी प्रकार की टिप्पणी से इनकार कर दिया.
साकेत थाने में मारपीट का आरोप
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट ने एक संयुक्त बयान जारी किया है.
बयान में आरोप लगाया है कि साकेत थाने के पुलिसकर्मियों ने अस्पताल परिसर में दोनों पत्रकारों के साथ हाथापाई की और उन्हें पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले गए। आरोप है कि थाने के भीतर महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट की गई।
बयान में यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने दोनों की धार्मिक पहचान पूछी और इसके बाद उनके ख़िलाफ़ कथित तौर पर धर्म विशेष से जुड़े अपशब्दों का इस्तेमाल किया. दोनों पत्रकारों को एफ़आईआर दर्ज करने की धमकी भी दी गई.
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
प्रेस संगठनों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने और स्वतंत्र जांच की मांग की है। ‘फोर पीएम न्यूज़ नेटवर्क’ ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल पर लिखा कि पत्रकार का कसूर सिर्फ सवाल पूछना था। संस्थान ने मांग की है कि घटना स्थल और साकेत थाने के सीसीटीवी फुटेज को तत्काल सुरक्षित किया जाए और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की जाए।
प्रेस संगठनों ने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के मुताबिक़ दोनों पत्रकारों के शरीर पर चोट के कई निशान थे.
विपक्ष ने साधा निशाना
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस घटना पर केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने पर महिला पत्रकारों को पीटा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक पहचान का पता चलने पर हमला और तेज कर दिया गया, जो कि लोकतंत्र की जगह ‘पुलिस राज’ का प्रतीक है।