झारखंड: हज़ारीबाग के वरिष्ठ पत्रकार को इलाज के लिए आपकी आर्थिक मदद और दुआओं की जरूरत है
जब पत्रकारिता का जुनून गहरा हो, तो शरीर की तकलीफें भी हौसलों के आगे घुटने टेकने लगती हैं. BBC के लिए कभी रवि प्रकाश ने जिस हिम्मत से कैंसर से लड़ने की कोशिश की, ठीक उसी तरह हज़ारीबाग के वरिष्ठ पत्रकार अनवर फिदवी की जिंदगी इन दिनों इसी जज़्बे का जीवंत उदाहरण बनी हुई है.
पिछले ढाई वर्षों से वे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लगातार जंग लड़ रहे हैं. दर्द से गुज़रती रातें और अस्पतालों के चक्कर भी सच को सामने लाने की उनकी प्रतिबद्धता और कलम की धार को कम नहीं कर सके.
इलाज की लंबी प्रक्रिया के तहत उन्हें हर महीने परामर्श और फॉलोअप के लिए रांची और धनबाद के कैंसर विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता है.
निरंतर जारी महंगे इलाज, कीमोथेरेपी और दवाइयों के खर्च ने अब उनके पारिवारिक और आर्थिक संसाधनों को पूरी तरह निचोड़ दिया है.
शारीरिक थकान और वित्तीय दबाव के बीच भी अनवर फिदवी ने अपने काम से दूरी नहीं बनाई है, लेकिन अब उनके लिए यह जंग केवल हौसले के बल पर लड़ना मुश्किल होता जा रहा है.
अनवर फिदवी भावुक होते हुए कहते हैं कि “कभी शरीर थक जाता है, कभी परिस्थितियां हौसला तोड़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन अपनों का साथ और दुआएं हिम्मत बांधती हैं, अभी सफर बाकी है और कलम को बहुत कुछ लिखना है.”
एक निर्भीक पत्रकार जिसने हमेशा समाज की आवाज़ बनकर दूसरों के हक की लड़ाई लड़ी, आज खुद ज़िंदगी की सबसे कठिन लड़ाई के मोड़ पर खड़ा है.
इस मुश्किल घड़ी में उन्हें न केवल आपकी दुआओं की ज़रूरत है, बल्कि आर्थिक सहयोग की भी सख्त आवश्यकता है.
सहयोग और मदद की अपील:
तमाम प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों से विनम्र अपील है कि आगे आएं और अनवर फिदवी के इलाज के लिए यथासंभव आर्थिक मदद करें. आपका एक छोटा-सा योगदान इस जुझारू पत्रकार को जिंदगी की जंग जिताने और उनकी कलम को फिर से शब्दों को पिरोने की ताकत दे सकता है.
आइए, एकजुट होकर इस कलम के सिपाही का हाथ थामें और कैंसर के विरुद्ध उनकी इस लड़ाई में साथ खड़े हों.