सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए दिहाड़ी मज़दूर की बेटी पूनम कुमारी ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 99.1375 परसेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक 16,972 प्राप्त कर इतिहास लिख दिया है.
Jharkhand: कहते हैं, जब इरादे फौलादी हों और हौसलों में उड़ान भरने की हिम्मत हो, तो गरीबी की दीवारें भी घुटने टेक देती हैं.
धनबाद की भूदा बस्ती की गलियों से उठी एक ऐसी ही कहानी आज हर उन माता-पिता की आँखों में उम्मीद जगा रही रही है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों के लिए ऊँचे सपने देखने से डरते हैं.
एक साधारण दिहाड़ी मजदूर की होनहार बेटी पूनम कुमारी ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में 582 अंक (99.13 परसेंटाइल, ऑल इंडिया रैंक 16,972) हासिल कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी अमीर की जागीर नहीं होती.
पूनम कहती हैं,
“पापा दिन-रात पसीना बहाते थे, ताकि हमारा पेट भर सके… आज जब मेरी नीट में रैंक आई, तो उनके चेहरे पर थकावट नहीं, सिर्फ गर्व के आँसू थे।”
अभावों की पथरीली राह पर ‘सपनों’ की उड़ान
पूनम के पिता धरमू गोराई रोज़ सुबह इस उम्मीद में काम की तलाश में निकलते हैं कि आज घर का चूल्हा जलेगा.
ऐसे हालात में माँ पीपू देवी गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा तंगहाली के बीच भी पूनम के हौसले को टूटने नहीं दिया.
पूनम ने भी अपनी गरीबी को मजबूरी नहीं, बल्कि अपनी ढाल बनाया.
‘एसएसएलएनटी सीएम उत्कृष्ट गर्ल्स विद्यालय’ से पढ़ाई करते हुए पूनम ने पहले सीबीएसई 12वीं बोर्ड में 97.4% अंक लाकर धनबाद ज़िले में टॉप किया और अब नीट की कठिन परीक्षा में अपनी सफलता का झंडा फहरा दिया.
उनकी इस सफलता पर धनबाद ज़िलाधिकारी खासे उत्साहित हैं. वह कहते हैं,
“अब एडमिशन से लेकर डॉक्टर बनने तक का सारा खर्च हमारा.”
पूनम की इस ऐतिहासिक सफलता पर धनबाद के उपायुक्त श्री आदित्य रंजन ने उन्हें समाहरणालय में भावुक मन से सम्मानित किया.
पूनम की आँखों में छिपी डॉक्टर बनने की तड़प को देखते हुए उपायुक्त ने घोषणा की:
“माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, पूनम की मेडिकल की पूरी पढ़ाई का खर्च जिला प्रशासन उठाएगा। किसी भी गरीब बच्चे का सपना अब पैसों की तंगी से नहीं टूटेगा।”
पूनम अपनी इस सफलता पर कहती हैं कि “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस ने लिखी मेरी असफलता की इबारत वरना कोचिंग करने के मेरे पास पैसे तक नहीं थे.”
पूनम भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) बनकर देश के उन गरीबों की सेवा करना चाहती हैं, जो इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं. अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और राज्य सरकार को देते हुए पूनम का गला भर आया.
पूनम ने कहती हैं,
“हमारे पास महंगे कोचिंग और प्राइवेट स्कूलों के पैसे नहीं थे. अगर झारखंड सरकार का ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ न होता, तो शायद मेरा यह सपना अधूरा ही रह जाता. यहाँ मुझे सीबीएसई पैटर्न पर बेहतरीन मार्गदर्शन मिला. माननीय मुख्यमंत्री जी का दिल से धन्यवाद, जिन्होंने हम जैसे बच्चों के बंद रास्तों को खोल दिया.”
पूनम की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है; यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े उस हर परिवार की जीत है, जो अभावों में भी आसमान छूने की चाह रखता है. आज पूरा धनबाद पूनम की इस सफलता पर मुस्कुरा रहा है और उसकी हिम्मत को सलाम कर रहा है.