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कौन हैं अवनी केजरीवाल जो पुनर्मूल्यांकन के बाद बनीं CBSE बारहवीं की राष्ट्रीय कॉमर्स टॉप

21 जून 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा जारी किए गए बारहवीं पुनर्मूल्यांकन परिणाम में सौ प्रतिशत अंक लाकर रांची की अवनी केजरीवाल राष्ट्रीय टॉपर बन गई हैं.

इससे पहले 13 मई को घोषित सीबीएसई परीक्षा परिणाम में उन्हें 95.2 प्रतिशत अंक आए थे.

दरअसल अवनी केजरीवाल को उनके पसंदीदा विषय अंग्रेज़ी में 81 अंक ही हासिल हुए थे.

वह कहती हैं कि “अंग्रेज़ी में 19 अंक कम आए जिसकी मुझे कतई उम्मीद नहीं थी. ये मेरा सबसे मज़बूत विषय है, इस लिए मैंने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया.”

अंग्रेज़ी के अलावा अवनी को बिज़नेस स्टडीज़ में 95 अंक मिले थे. 

जबकि तीन विषयों एकाउंटेंसी, एप्लाइड मैथ्स व इकोनॉमिक्स में अवनी को पहले ही 100 में 100 अंक मिल चुके थे.

वह कहती हैं कि “पुनर्मूल्यांकन का फैसला सही साबित हुआ और मुझे अंग्रेज़ी में उन्नीस व बिज़नेस स्टडीज़ में पांच अंकों की वृद्धि के साथ सभी पांच विषयों में सौ प्रतिशत की प्राप्ति हो गई.”

अवनी की सफलता पर परिवार की प्रतिक्रिया

रांची के धुर्वा स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल एसएआईएल टाउनशिप से कॉमर्स में बारहवीं की पढ़ाई करने वाली अवनी केजरीवाल का परिवार उनकी इस सफलता से अत्यंत उत्साहित है.

उनके दादा पवन केजरीवाल भावुक स्वर में कहते हैं कि “मेरे पास शब्द ही नहीं, अवनी ने मुझे जीवन की दूसरी बार खुशी दी. पहली बार जब उसका जन्म हुआ तो दूसरी बार अब नेशनल टॉपर बन कर.”

दादा केजरीवाल का मानना है कि अवनी के जैसा आत्मविश्वास मैंने किसी में नहीं देखा.

वह कहते हैं कि “उसके आत्मविश्वास को देखकर ये तय था कि परीक्षा में वह बहुत अच्छा करेंगी. 500 में 500 अंक लाकर उन्होंने ये दिखा भी दिया.

अवनी की इस सफलता का श्रेय पवन केजरीवाल अवनी को ही देते हैं.

पवन केजरीवाल से सहमत अवनी की दादी ललिता केजरीवाल भी मानती हैं कि अवनी की ये सफलता एक दिन का परिणाम नहीं है.

वह कहती हैं कि “बचपन से पढ़ाई के प्रति इतनी लगन थी कि यदि वह पढ़ रही हैं और कहा जाए कि खाना खा लो या कहीं जाना है, वह हमेशा न ही कहतीं जब तक वह पढ़ाई पूरी न करलें.”

दादी ललिता केजरी वाल से सहमत अवनी के पिता मितेश केजरीवाल भी मानते हैं कि अवनी की ये सफलता अनुशासन में रह कर प्राथमिक स्तर से किए गए कड़े परिश्रम का परिणाम है. 

वह कहते हैं कि “अवनी को बारहवीं में अच्छे अंक मिलेंगे इसकी झलक उन्होंने दसवीं 97.2% अंक लाकर दिखा दी थी.”

वह आगे कहते हैं “लेकिन मेरी बेटी नेशनल टॉपर बन जाएगी इसका आभास हमें बिल्कुल नहीं था. इस लिए जश्न हमने और जम कर मनाया.”

राष्ट्रीय टॉपर बनकर अवनी ने दिया Father’s Day का तोहफा

21 जून की शाम जब अवनी का परिणाम जारी हुआ तो ये दिन Father’s Day होने की वजह से और भी खास हो गया. 

अत्यंत उत्साहित लहजे में मितेश केजरीवाल कहते हैं कि “परीक्षा परिणाम Father’s Day की शाम आय, अवनी ने राष्ट्रीय टॉपर बनकर Father’s Day का बेहतरीन तोहफ़ा दे दिया.”

वह आगे कहते हैं कि “रात के करीब 11:40-45 हो रहे थे और मैं और अवनी खुशी के मारे घंटों डांस करते हुए एंजॉय करते रहे. ये मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बन गया.”

पिता मितेश की तरह अवनी की मां पूनम केजरीवाल के चेहरे पर अवनी की सफलता से मिलने वाली खुशी पढ़ी जा सकती थी.

वह कहती हैं कि “बेटी नेशनल टॉपर बनी हैं, इस बात की बहुत खुशी है, लेकिन पहली बार सुनने पर भरोसा करन बहुत मुश्किल हो रहा था, ये तब जब मैं पढ़ाई के प्रति अवनी के समर्पण को बचपन से देखते आरही हूं.”

पूनम केजरीवाल ने अपनी बेटी अवनी की इस सफलता का श्रेय अनुशासित और लक्ष्य-उन्मुख तैयारी को देती हैं.

वह कहती हैं कि “उनकी पढ़ाई की दिनचर्या पढ़ाई के घंटों पढ़ाई कारण के बजाए दैनिक लक्ष्यों को पूरा करने पर केंद्रित रही”

वह आगे कहती हैं कि “उनके इस तकनीक से यह सुनिश्चित होता था कि वह समय की परवाह किए बिना हर दिन दो या तीन निर्धारित विषयों को पढ़ें और उसका रिवीज़न करें.”

सफलता का श्रेय परिवार सहित शिक्षकों को

अवनी मानती हैं कि हर कदम पर उनके दादा – दादी व माता पिता साथ खड़े मिलते.

अवनी के अनुसार जब भी उन्हें किसी तरह की परेशानी या तनाव महसूस होता उनके दादा-दादी व माता-पिता फौरन उनका आत्मविश्वास बढ़ाते और उस मुश्किल या तनाव से बाहर निकलते.

वह बताती हैं कि उनके माता पिता हर परिस्थिति में साथ खड़े मिलते. 

परिवार ने कभी भी अवनी पर अच्छे मार्क्स लाने का दबाव नहीं डाला. बल्कि हमेशा यही कह कि बस अपना बेस्ट करो. जो भी रिज़ल्ट आए, वे उससे खुश होंगे.

अवनी कहती हैं कि “मुझे लगता है कि परिवार का सपोर्ट एक महत्वपूर्ण कारण है जिसकी वजह से मैं यह राष्ट्रीय टॉपर बन पाई हूं.”

अवनी की मां बताती हैं कि 18 मई को घोषित परिणाम में जब 95.2% अंक मिले तो अवनी बहुत उदास थीं. उस समय फ़ैमिली के साथ शिक्षकों ने भी सपोर्ट किया और री-इवैल्यूएशन करवाने की ज़ोर कही.

अवनी की मां पूनम केजरीवाल कहती हैं कि “हम सभी ने अवनी का आत्मविश्वास बढ़ाते हुए री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया.

अवनी कहती हैं “शिक्षक और परिवार के सपोर्ट की वजह से मैने री-इवैल्यूएशन कराया और सौ प्रतिशत अंक हासिल कर लिए.”

अवनी की इस सफलता पर मां पूनम केजरीवाल का मानना है कि मेहनती होने के साथ अगर अवनी ने अपने लिए कोई लक्ष्य या सीमा तय कर ली तो उसे हासिल करने के लिए वह पूरी तरह से उस पर तब तक लगी रहती हैं जबतक वह लक्ष्य प्राप्त न कर लें.

वह कहती हैं “ऐसा आज नहीं हुआ बल्कि बचपन से ही वह ज़बरदस्त लगन और जुनून के साथ तय लक्ष्य को हासिल करती हैं.”

पूनम मानती हैं कि इसी समर्पण की वजह से अवनी को सोशल मीडिया ने कभी नुकसान नहीं पहुंचाया.

सोशल मीडिया के इस्तेमाल के सवाल पर अवनी का मानना है कि सोशल मीडिया पर रहना है या नहीं रहना, यह काफी हद तक व्यक्ति पर निर्भर करता है, खासकर उनके आत्म-नियंत्रण पर.

अवनी का मानना है कि सोशल मीडिया के इस दौर में अपने समय को मैनेज करने की क्षमता सबसे ज़रूरी है. 

वह कहती हैं कि “मैं भी कुछ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर थी,—हालांकि बहुत ज़्यादा एक्टिव नहीं थी.”

हालांकि अवनी के अनुसार इस दौर में सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना काफी ज़रूरी हो गया है.

वह कहती हैं कि “क्योंकि इन माध्यमों के ज़रिए नेटवर्किंग के बड़े मौके मिलते हैं. जो हमें धीरे-धीरे डिजिटल दुनिया की ओर बढ़ा रहा है.”

बिज़नेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने का है लक्ष्य

अवनी केजरीवाल अपना कैरियर व्यापार से संबंधित क्षेत्र में बनाना चाहती हैं. उनका मानना है कि वह ऐसा कोर्स करेंगी जिससे व्यापार जगत में प्रवेश करने में आसानी हो.

वह कहती हैं कि “’मैंने बारहवीं में कॉमर्स लिया ताकि बिज़नेस लाइन, फाइनेंस साइड का बेहतर अध्ययन कर सकूं.”

आगे की पढ़ाई करने के लिए किस कॉलेज में दाखिले का लक्ष्य है? 

इस सवाल पर वह कहती हैं कि कॉलेज के बारे में अभी फैसला नहीं लिया, सीयूईटी-यूजी 2026 की परीक्षा दी है और अच्छे विश्वविद्यालय में प्रवेश की उम्मीद कर रही हूं.