लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘जमीयत उलमा-ए-हिन्द उत्तर प्रदेश’ के तत्वावधान में ‘हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन’ के दौरान देश की प्रतिष्ठित धार्मिक हस्तियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देश में बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाई.
जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और वाराणसी के प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र ने देश के वर्तमान सामाजिक व राजनीतिक हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की और समाज को जोड़ने का संदेश दिया.
नफ़रत के खिलाफ मोहब्बत की मुहिम: मौलाना अरशद मदनी
जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश के मौजूदा हालात पर कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों ने देश के माहौल को पूरी तरह खराब कर दिया है. पिछले कुछ वर्षों में नफ़रत की राजनीति इस कदर बढ़ी है कि अब मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम भी निशाने पर आ गया है. इस स्थिति ने देश को एक ऐसे दोराहे पर ला खड़ा किया है, जहाँ से आगे का रास्ता धुंधला दिखाई देता है.
मौलाना मदनी ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि अंग्रेज़ों के खिलाफ भी पहली बुलंद आवाज़ दिल्ली के एक मदरसे से हज़रत शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस देहलवी ने उठाई थी। उन्होंने कहा:
“नफ़रत की इन तेज़ आँधियों में जमीयत उलमा-ए-हिन्द मोहब्बत के चिराग़ को जलाने निकली है. परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी विस्फोटक हों, हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने चरित्र और कर्म से इस निराशा को आशा में बदलने का प्रयास करना चाहिए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का यह सम्मेलन जमीयत द्वारा शुरू की गई एक व्यापक जनआंदोलन मुहिम का पहला चरण है.
मौलाना मदनी ने संगठन का रुख साफ करते हुए कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द एक गैर-राजनीतिक व धार्मिक संगठन है, जिसका चुनाव लड़ने या लड़ाने से कोई संबंध नहीं है.
इसका उद्देश्य केवल इंसानियत के आधार पर देश में भाईचारा, एकता और सद्भाव कायम करना है.
उन्होंने संगठन द्वारा केरल-पंजाब बाढ़ पीड़ितों की बिना भेदभाव सहायता करने और असम में एनआरसी के दौरान 40 लाख महिलाओं (जिसमें 25 लाख गैर-मुस्लिम महिलाएँ शामिल थीं) की नागरिकता सुरक्षित करने के प्रयासों का भी जिक्र किया.
इसके अलावा, मौलाना मदनी ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया और व्यवस्था में बदलाव की मांग की.
वहीं, रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय विवाद पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन होने पर जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन पूरी इमारत को मलबे में तब्दील कर देना सही नहीं है, क्योंकि इससे हजारों छात्रों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा.
अन्याय के विरुद्ध हर नागरिक को उठानी होगी आवाज़: डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र ने मौलाना मदनी की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया.
उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी में सभी वर्गों का खून शामिल है और इस मिट्टी से किसी के योगदान को अलग नहीं किया जा सकता.
डॉ. मिश्र ने समाज की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा:
“आज देश में ऐसे हालात इसलिए बने हैं क्योंकि लोगों ने सच बोलना छोड़ दिया है। हर व्यक्ति इस इंतज़ार में रहता है कि कोई दूसरा आवाज़ उठाए। इस तरह देश नहीं चल सकता। अब देश में हो रहे अन्याय के विरुद्ध हर नागरिक को खुलकर बोलना होगा.”
उन्होंने मंच से घोषणा की कि मौलाना अरशद मदनी ने देश को जोड़ने का जो बीड़ा उठाया है, वे उसका पूर्ण समर्थन करते हैं और जहाँ भी आवश्यकता होगी, वे इस मुहिम में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे.
बुद्धिजीवी वर्ग का मौन दुर्भाग्यपूर्ण: इंदिरा जय सिंह
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने भी सम्मेलन को संबोधित किया.
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं। देश के मौजूदा हालात को देखकर होने वाली चिंताओं के बीच, आज इस मंच पर सभी धर्मों के लोगों की एकजुटता ने यह विश्वास दिलाया है कि इस देश की एकता को कोई तोड़ नहीं सकता.
हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुःख व्यक्त किया कि “लोकतंत्र को दिशा दिखाने वाला बुद्धिजीवी वर्ग आज मौन है”, जिसे उन्होंने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक बताया.
देशव्यापी अभियान का संकल्प
अभियान के संयोजक एवं जमीयत के उपाध्यक्ष मौलाना असजद मदनी ने सम्मेलन का घोषणा-पत्र पढ़कर सुनाया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर सर्वसम्मति से समर्थन दिया.
उन्होंने बताया कि इस गैर-राजनीतिक अभियान के तहत पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि प्राचीन साझा संस्कृति, प्रेम और सहिष्णुता की परंपरा को फिर से मजबूत किया जा सके.
प्रांतीय अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का एक मंच पर आना इस बात का प्रमाण है कि प्रेम की आवाज़ नफ़रत से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है.
सम्मेलन को बौद्ध, ईसाई और सिख धर्म के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी संबोधित कर इस मुहिम को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया.