“JPSC पीटी परिणाम में धांधली हुई है, सरकार से न्याय नहीं मिलने पर छात्रहित में भूख हड़ताल करने पर मजबूर हैं.”
ये शब्द देवेंद्र नाथ महतो के हैं. अनशन के कारण इनकी आवाज़ में कमज़ोरी साफ झलक रही है.
साल 2016 से देवेंद्र नाथ महतो के आंदोलन के साथी जोगेश भारती बताते हैं कि ये कमज़ोरी सत्याग्रह के बाद धीरे धीरे आई है, जो अब अनशन के कारण बढ़ गई है.
लेकिन उनका हौसला बिल्कुल अडिग है.
क्या अभी तक सरकार की तरफ से किसी ने संपर्क किया?
इस सवाल पर नज़दीक खड़ी पूजा महतो कहती हैं कि “अभी तक सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई हालचाल जानने नहीं आया.”
पूजा महतो की इस शिकायत पर झारखंड सरकार की एक कैबिनेट मंत्री कहती हैं कि “आज मुख्यमंत्री जी लौटे हैं, मैं आश्वस्त हूं कि इस संबंध में वर्कआउट हो जाएगा.”
देवेंद्र नाथ महतो के स्वास्थ से संबंधित सवाल पर संजय महतो बताते हैं कि रांची के सदर अस्पताल की तरफ से आई डॉक्टर की टीम लगातार स्वास्थ्य जांच कर रही है.”
इस संबंध में रांची जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने सोमवार की शाम जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि “भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो स्टेबल हैं.”
भूख हड़ताल का रास्ता क्यों अपनाया?

झारखंड की लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और कटऑफ में हेरफेर से देवेंद्र नाथ महतो आहत हैं.
देवेंद्र नाथ का तर्क है कि जब से झारखंड की स्थापना हुई है उन्होंने राज्य की इन नियुक्ति परीक्षाओं को कभी किसी आरोप के बिना संपन्न होते नहीं देखा.
वह कहते हैं कि “ऐसे हालात में छात्रहित के लिए किसी को तो ठोस कदम उठाना ही था, ऐसे में मैने भूख हड़ताल का रास्ता चुन लिया.”
दरअसल दो जून को 14वीं JPSC की पीटी परीक्षा का परिणाम आया. जिसमें धांधली का आरोप लगाते हुए 5 जुलाई से ही देवेंद्र नाथ महतो ने इसका विरोध शुरू किया.
इस संबंध में उन्होंने सात जुलाई को झारखंड के राज्यपाल से मुलाकात की. 20 जुलाई को मुख्यमंत्री जी से मुलाकात की.
वह कहते हैं “तब जाकर JPSC के इस परिणाम की जांच शुरू हुई. जिसमें ग्यारह लोग गिरफ्तार हुए, जेपीएससी अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया.
कार्रवाई तो हो रही थी फिर आपने JPSC विरोध को आंदोलन का रूप क्यों दिया?
इस सवाल पर वह कहते हैं कि हमारी मांग है कि इस धांधली की जांच CBI से करवाई जाए, और परीक्षा परिणाम को स्थगित किया जाए.”
देवेंद्र नाथ महतो की इस मांग पर झारखंड सरकार के एक मंत्री का तर्क है कि पिछली कई जेपीएससी परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी ने की है, किसी का परिणाम नहीं आया.
उनका कहना है कि “इस लिए छात्र इस बार बार अपने राज्य की जांच एजेंसी सीआईडी पर भरोसा करें.
वह आगे कहते हैं कि “जब से मामला सीआईडी के हाथ में दिया गया है एक के बाद एक करवाई हो रही है.”
परीक्षा स्थगित करने के सवाल पर उनका कहना है कि “जांच में अगर कहीं गड़बड़ी पाई गई तो पेपर कैंसिल किया जाएगा.”
दरअसल छात्रों की इस लड़ाई को आगे और बढ़ाने के लिए सत्याग्रह के नौवें दिन यानी 2 अगस्त को अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो कहते हैं कि “हम अन्न को त्याग कर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. भूख हड़ताल के सारे नियम को हम पालन करेंगे और सरकार को घुटने में टेकने के लिए मजबूर करते हुए सारे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई को सुनिश्चित कराएंगे.”
JPSC की परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TDPL को लेकर देवेंद्र नाथ महतो को शिकायत है.
उनका सवाल है कि JPSC परीक्षा फार्म भरने से लेकर परिणाम घोषित करने तक हर कदम की ज़िम्मेदारी कैसे एक ही एजेंसी को दी जा सकती है.
देवेंद्र कहते हैं कि “यही वजह है कि अभीतक TDPL के द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं की जांच करवाई जाए.”
देवेंद्र के नजदीक खड़ी पूजा का सवाल है कि “
TDPL को पहले उत्तरप्रदेश ने ब्लैकलिस्ट किया उसके बाद JSSC ने. इसके बावजूद जेपीसी परीक्षाओं की ज़िम्मेदारी TDPL के पास क्यों है?”
वह आगे कहते हैं कि “JPSC, JSSC को रिफॉर्म करने की आवश्यकता है. इस लिए जब तक सरकार हमारी बात को नहीं मानेगी, देवेंद्र नाथ महतो मुख से कोई भी अन्न का ग्रहण नहीं करेगा.”
कैसे बने देवेंद्र नाथ महतो छात्र नेता?
रांची ज़िले के सुदूरवर्ती ब्लॉक राहे स्थित कापीडीह गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और असाधारण अकादमिक उपलब्धियों से भरा रहा है.
ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हमेशा अपनी पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान हासिल किया।
उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर एक नज़र
मैट्रिक (2006): झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) से बुंडू के विद्यालय से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण।
इंटरमीडिएट विज्ञान (2008): प्रथम श्रेणी में सफलता प्राप्त की।
स्नातक (Graduation): डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से संस्कृत विषय में प्रथम श्रेणी से स्नातक।
बी.एड (B.Ed 2015-17): हजारीबाग से प्रथम श्रेणी में पास किया।
प्रथम स्नातकोत्तर (PG – Sanskrit 2018-20): डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया।
द्वितीय स्नातकोत्तर (PG – Kurmali & Regional Languages 2020-22): जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय से कुरमाली भाषा में प्रथम श्रेणी में दूसरी पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
वर्तमान में PHD कर रहे देवेंद्र नाथ महतो का छात्र राजनीति और जनहित के मुद्दों से जुड़ाव वर्ष 2015 से है.
छठी JPSC परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे बड़े आंदोलन के दौरान उनके जीवन में एक गहरा व्यक्तिगत संकट आया, जब उन्होंने अपनी माता दमयंती देवी को खो दिया.
उस दौरान इस पारिवारिक क्षति और व्यक्तिगत दुख के बावजूद उन्होंने अभ्यर्थियों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई से अपने कदम पीछे नहीं खींचे.
वे पिछले एक दशक से स्कॉलरशिप वितरण, पेपर लीक मामलों, अस्पष्ट नियमावली, नियोजन नीति और भर्ती आयोगों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रखर आवाज़ बने हुए हैं.
राजनीति में कदम
साल 2023 के आखिर में ‘साठ-चालीस नाय चलतो’ खोरठा भाषा के स्लोगन के साथ नियोजन नीति पर सवाल खड़े करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने स्पीकर के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी.
इस मांग में कहा गया कि किसी भी जॉब में साठ प्रतिशत मूलवासी और चालीस प्रतिशत बाहरी के बजाए 80 फीसद मूलवासी और बीस प्रतिशत बाहरी के अनुपात में नियोजन नीति तय हो.
जब मांगें पूरी नहीं हुईं तो देवेंद्र नाथ महतो ने शपथ ली कि जबतक खतियानी आधारित नियोजन नीति लागू नहीं होगी तबतक वह अपना बाल नहीं कटवाएंगे.
इसी दौरान 2024 लोकसभा चुनाव आगए.
उनके नजदीकी मित्र संजय कहते हैं कि देवेंद्र महतो ने वर्तमान विधायक जयराम महतो सहित अन्य आंदोलन के साथियों के साथ मिल कर तय किया कि अब झारखंड में मूलवासियों को लोकसभा चुनाव लड़ने होगा क्योंकि जीतकर संसद पहुंचेंगे तब ही हालात बदल सकते हैं.
साल 2024 लोकसभा चुनाव में देवेंद्र महतो रांची लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़े और एक लाख बत्तीस हज़ार वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे. जबकि दूसरे नंबर पर गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी
यशस्विनी सहाय रहीं जिन्हें पांच लाख चौवालीस हज़ार वोट मिले.
लेकिन देवेंद्र के मतों की अहमियत को समझना है तो यशस्विनी की इस हार पर गौर करें तो पाएंगे कि देवेंद्र और यशस्विनी के मतों की कुल संख्या भाजपा प्रत्याशी से अधिक हैं, क्योंकि छह लाख चौंसठ हज़ार मत हासिल कर संजय सेठ भाजपा के सांसद बन गए.
इसके बाद जयराम महतो ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई और उनके बाद पार्टी के सबसे दमदार चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो ने 2024 में विधानसभा चुनाव लड़ा.
इस चुनाव में देवेंद्र नाथ महतो को महतो बाहुल सिली सीट पर इकतालीस हज़ार वोट मिले.
उनके मतों के महत्व को पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो की हर से समझ सकते हैं.
सुदेश महतो को 49 हज़ार मत हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे. जबकि गठबंधन प्रत्याशी अमित कुमार तिहत्तर हज़ार मत हासिल कर विधायक बन गए.
देवेंद्र के साथी संजय दावा करते हैं कि “सभी विधानसभा सीटों पर हारे प्रत्याशियों में आज भी झारखंड के सबसे अधिक सक्रिय प्रत्याशी देवेंद्र नाथ महतो हैं.”